इस संग्रह में जो भी सामग्री है, उसकी सूची यहाँ है — जो पढ़ी जा चुकी है और जो अभी केवल छायाचित्र के रूप में रखी है, दोनों। जिन पृष्ठों का पाठ उतारा जा चुका है, उनके आधार पर ही अन्य पृष्ठों पर कथन लिखे गए हैं; शेष सामग्री सूचीबद्ध है, उद्धृत नहीं।
वर्तमान स्थिति
2
सूचीबद्ध स्रोत
21
पुस्तिका के पृष्ठ-छायाचित्र — 3 पहचाने गए, 18 शेष
4
स्मारक-छायाचित्र — पाठ उतारा जा चुका
4–31
पृष्ठ-परिसर जिससे पाठ उतारा गया
1
पुस्तिका से स्वतंत्र स्रोत
01
सूचीबद्ध स्रोत
श्री मुल्तान सिंह वर्मा जी की संक्षिप्त जीवनी
MSV-ARCH-PUB-001
लेखक
ओम प्रकाश गांधी — संस्था के भीतर के सहकर्मी तथा समकालीन; प्राक्कथन पर पूरा नाम इसी रूप में अंकित
विधि
प्राक्कथन के अनुसार विवरण स्वयं मुल्तान सिंह वर्मा के “श्रीमुख से” सुनकर लिखा गया, तथा “यत्र-तत्र सुन-सुनाकर” प्राप्त तथ्य भी सम्मिलित हैं। अतः यह अंशत: प्रत्यक्ष कथन है और अंशत: संकलित सुनी-सुनाई बात — दोनों एक ही पाठ में मिले हुए, अलग-अलग चिह्नित नहीं।
लेखक की घोषणा
वे स्वयं लिखते हैं कि वे इसे “तथ्यात्मक विसंगतियों से सर्वथा विहीन” नहीं मानते और पाठकों के उचित संशोधन स्वीकार करके अगले संस्करण में सम्मिलित करेंगे। इस अभिलेखागार की सत्यापन-नीति स्रोत की अपनी शर्त के अनुरूप है।
प्रकाशक
चौधरी प्रिंटिंग प्रैस, रामपुर मनिहारान, सहारनपुर
संस्करण
प्रथम, सन् 1982; प्राक्कथन पर दिनांक 15 मई 1982
वर्गीकरण
परवर्ती प्रकाशन (श्रेणी 3), परन्तु उसका आधार स्वयं विषय-व्यक्ति का कथन है — इस सीमा तक श्रेणी 2 का मूल्य भी रखता है। विषय के जीवनकाल में, संस्था के भीतर से लिखा गया। साक्ष्य-क्रम
पाठ उतारा
पृष्ठ 4–31
शेष
पृष्ठ 1 (शीर्षक तथा प्रकाशन-विवरण) — पुनः पठन अपेक्षित। पृष्ठ 2 (प्राक्कथन), 3 (मंगलाचरण) तथा 27 (संस्था-सूची) उतारे जा चुके।
ज्ञात त्रुटि
पृष्ठ 18 की दान-तालिका के योगफल आपस में मेल नहीं खाते; आँकड़े जैसे मुद्रित हैं वैसे ही रखे गए हैं। तालिका
प्रतिमा तथा शिलालेख, गोचर महाविद्यालय परिसर
MSV-ARCH-MON-001
स्थान
गोचर महाविद्यालय, रामपुर मनिहारान (सहारनपुर) — भवन के सम्मुख, चबूतरे पर श्वेत प्रतिमा
शिलालेख
तीन पट्टिकाएँ — ऊपरी: अनावरण-विवरण तथा तिथि; मध्य: “यह प्रतिमा स्व. श्री मुल्तान सिंह वर्मा जी की है” से आरम्भ होने वाला परिचय-लेख; निचली: जन्म — मृत्यु, देवनागरी अंकों में दोनों तिथियाँ
वर्गीकरण
संस्थागत स्मारक-अभिलेख — पुस्तिका से पूर्णत: स्वतंत्र, तथा निधन के पश्चात संस्था द्वारा उत्कीर्ण। तिथियों के प्रश्न पर इस अभिलेखागार का निर्णायक स्रोत: जन्म अथवा मृत्यु की तिथि पर किसी भी विरोध में शिलालेख का पाठ अन्तिम माना जाएगा।
पाठ उतारा
तीनों पट्टिकाएँ, 5 सितम्बर 2026 के निकट-छायाचित्रों से — नीचे यथावत् दर्ज
वर्तनी
शिलालेख पर नाम “मुलतान सिंह वर्मा” उत्कीर्ण है, पुस्तिका में “मुल्तान”। दोनों रूप दर्ज; इस संग्रह में पुस्तिका का रूप रखा गया है।
तीनों पट्टिकाओं का यथावत् पाठ — जन्म तथा मृत्यु की तिथियाँ, परिचय-लेख तथा अनावरण-विवरण — सन्दर्भ पृष्ठ पर दर्ज है।
पुस्तिका इस अभिलेखागार का प्रथम स्रोत है — एकमात्र नहीं। जब तक दूसरा स्रोत सूचीबद्ध नहीं होता, इस पुस्तिका का कोई कथन “सत्यापित” नहीं कहा जाएगा, केवल “अंकित”।
02
पृष्ठ-छायाचित्र
संग्रह में इस समय पुस्तिका के 21 पृष्ठ-छायाचित्र तथा प्रतिमा के चार छायाचित्र हैं — कुल 25 वस्तुएँ, जिनमें से सात पहचानी जा चुकी हैं। इनमें पृष्ठ-संख्या सभी पर स्पष्ट नहीं है, अतः पूरी सूची क्रम में नहीं दी जा सकती; जिन पृष्ठों की पहचान हो चुकी है, वे नीचे दर्ज हैं। शेष का सूचीकरण होते ही यहाँ जुड़ेंगे।
MSV-ARCH-IMG-018
पृष्ठ 18 — 10-8-43 की अन्तरंग सभा की बैठक, प्रस्ताव सं. 9; 12 सितम्बर 1943 की चौपाल-बैठक; मौजा रामपुर तथा मौजा किशन खेड़ी की दान-तालिका; 21 सितम्बर 1943 की रजिस्ट्री; तथा चन्दे के प्रथम डेपुटेशन का विवरण।
इसी पृष्ठ से “विधवा” वाली पंक्ति का अर्थ स्पष्ट हुआ और तालिका पूरी की जा सकी।
MSV-ARCH-IMG-002
पृष्ठ 2 — प्राक्कथन। लेखक का पूरा नाम ओम प्रकाश गांधी; स्थान रामपुर मनिहारान (सहारनपुर), उत्तर प्रदेश; दिनांक 15 मई 1982। यहीं पुस्तिका की रचना-विधि तथा लेखक की अपनी सीमा-घोषणा अंकित है।
इसी पृष्ठ से यह भी मिलता है कि 1982 में संस्था का नाम गोचर कृषि इण्टर कालेज, रामपुर मनिहारान था और वर्मा जी उसके “भूतपूर्व संस्थापक प्रधानाचार्य” कहे गए हैं।
MSV-ARCH-IMG-003
पृष्ठ 3 — मंगलाचरण। यजुर्वेदीय शान्ति-पाठ (“ओ३म् यत्रो मित्रः शं वरुणः…”, समापन “ओ३म् शान्तिश्शन्तिश्शान्तिः”) तथा उसका हिन्दी अर्थ; अन्त में लेखक की पंक्ति — “भगवान की पवित्र वाणी द्वारा मंगलाचरण करके इस लघु जीवन गाथा के लेखन कार्य का श्रीगणेश करता हूं।”
इस पृष्ठ में जीवन-वृत्त का कोई तथ्य नहीं है; इसका अभिलेखीय मूल्य केवल इतना है कि यह पुस्तिका की आर्य समाजी शब्दावली तथा रचना-प्रयोजन दर्शाता है — “जीवन गाथा”, अर्थात् श्रद्धा-लेखन, जाँच-पड़ताल नहीं।
MSV-ARCH-MON-001 · छायाचित्र
प्रतिमा का सम्पूर्ण दृश्य — पृष्ठभूमि में महाविद्यालय भवन, जिस पर “गोचर … राज / रामपुर … (… नपुर)” अंकित है। चबूतरे की तीन पट्टिकाएँ इसी छायाचित्र में दिखती हैं।
पाठ के लिए तीनों पट्टिकाओं के निकट-छायाचित्र नीचे।
MON-001-C निचली पट्टिका — जन्म 12 अगस्त 1900, मृत्यु 16 जनवरी 1983MON-001-B मध्य पट्टिका — 1943 की दोनों तिथियाँ तथा डिग्री स्तर तक का उल्लेखMON-001-A ऊपरी पट्टिका — अनावरण, 2 अप्रैल 1984
शेष 18 छायाचित्र: MSV-ARCH-IMG- अनिर्दिष्ट — पृष्ठ-संख्या तथा विषय-सूची अंकित होना शेष। अपेक्षित: पृष्ठ 1 का स्पष्ट छायाचित्र, जिससे शीर्षक-पृष्ठ का प्रकाशन-विवरण पूरा हो सके।
03
अपेक्षित स्रोत
आठ स्रोत-वर्ग संकलन में हैं — रजिस्ट्रेशन कागज़ात, देवबन्द की रजिस्ट्री तथा खतौनी, सभा की प्रस्ताव-पुस्तिका, मान्यता तथा सम्बद्धता-आदेश, बोर्ड परिणाम, सेवा-अभिलेख, समाचार-कतरन, तथा मौखिक गवाही। प्रत्येक के सामने वह कथन जिसे वह सिद्ध अथवा खण्डित कर सकता है, सन्दर्भ पृष्ठ पर दर्ज है।
04
सूचीकरण की विधि
प्रत्येक भौतिक वस्तु को एक पहचान-संख्या दी जाती है — प्रकाशन PUB, छायाचित्र IMG, सरकारी अभिलेख GOV, स्मारक तथा शिलालेख MON, मौखिक गवाही ORL।
स्रोत का वर्गीकरण उसकी दूरी से होता है: समकालीन दस्तावेज़, प्रत्यक्षदर्शी कथन, परवर्ती प्रकाशन, अथवा स्मृति। यह वर्ग हर उद्धरण के साथ दिखाया जाता है।
पाठ जैसा है वैसा उतारा जाता है। तिथि, संख्या तथा नाम में सुधार नहीं किया जाता; असंगति हो तो टिप्पणी के रूप में अलग दर्ज होती है।
अस्पष्ट पाठ का अनुमान नहीं लगाया जाता। पृष्ठ 18 की पंक्ति महीनों तक “अस्पष्ट” अंकित रही, फिर स्पष्ट छायाचित्र मिलने पर भरी गई।
दो स्रोतों में विरोध हो तो दोनों रखे जाते हैं — पुराना हटाया नहीं जाता, और यह लिखा जाता है कि विरोध किस बिन्दु पर है।
जन्म तथा निधन की तिथि पर संस्था के शिलालेख (MON-001) का पाठ निर्णायक माना जाता है; किसी प्रकाशन अथवा स्मृति से विरोध होने पर शिलालेख की तिथि रखी जाएगी और विरोध टिप्पणी के रूप में दर्ज होगा।
स्रोत
दोनों सूचीबद्ध स्रोतों का पूर्ण विवरण तथा असंगति-सूची सन्दर्भ पृष्ठ पर है। सामग्री भेजने की विधि परिचय पृष्ठ पर।