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रामपुर मनिहारान की संस्था
गूजर ऐंग्लो वैदिक स्कूल → गोचर कृषि इण्टर कालेज तथा डिग्री कॉलेज, रामपुर मनिहारान
1 नवम्बर 1943
प्रारम्भ आर्य समाज मन्दिर के भवन में, 12 छात्रों के नाम तथा तीन अस्थायी अध्यापकों के साथ। शिलालेख इसे “एक छोटा सा स्कूल” कहता है, जिसे वे “डिग्री स्तर तक” पहुँचाकर सेवानिवृत्त हुए। 14 फरवरी 1944 को वे इसके मुस्तकिल हैडमास्टर बने और 30 जून 1962 तक प्रधानाचार्य रहे। अवकाश के बाद भी डिग्री कॉलेज में धर्म एवं संस्कृति पढ़ाते रहे। सन् 1982 में संस्था का नाम गोचर कृषि इण्टर कालेज, रामपुर मनिहारान था और पुस्तिका के प्राक्कथन में उन्हें उसका “भूतपूर्व संस्थापक प्रधानाचार्य” कहा गया है; नाम-परिवर्तन की तिथि तथा क्रम अभी अंकित नहीं मिला।
कक्षा-दर-कक्षा
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विस्तृत तिथियाँ तथा प्रमाण-स्थिति कालक्रम पर।
गूजर छात्रावास, नई मंडी, मुजफ्फरनगर
जुलाई 1943
सभा के प्रस्ताव सं. 5 पर किराये के मकान में खोला गया — स्कूल से चार महीने पहले। भूमिका: संस्थापक सभा के मन्त्री के रूप में।
पुस्तिका · माह तथा प्रस्ताव-संख्या
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भूमि तथा दान
रामपुर मनिहारान की संस्था किसी अनुदान से नहीं, दान की भूमि पर खड़ी हुई। 21 सितम्बर 1943 को श्रीमती पिरानी देवी तथा चौ. भरत सिंह ने देवबन्द जाकर 159 बीघे 15 बिस्से भूमि की रजिस्ट्री सभा के नाम कराई। पुस्तिका के अनुसार भूमि “डिग्री कॉलेज बनने तक” प्राप्त होती रही, अतः यह आँकड़ा प्रारम्भिक है, अन्तिम नहीं।
पुस्तिका में दर्ज छह दानकर्ता, रकबे के अवरोही क्रम में:
श्रीमती रानी रामकौर · भोगपुर572 बीघे 11 बिस्से
श्रीमती पिरानी देवी · रामपुर, किशन खेड़ी118 बीघे 3 बिस्से
श्रीमती प्रसन्नी देवी110 बीघे
श्रीमती मनोहरी · कांधला80 बीघे
चौ. भरत सिंह · रामपुर, किशन खेड़ी41 बीघे 10 बिस्से
लाला त्रिलोक चन्द जैन · रामपुर मनिहारान8 बीघे
केवल पहली रजिस्ट्री की तिथि अंकित है; शेष चार दानों की तिथि पुस्तिका में नहीं है, अतः क्रम रकबे का रखा गया है। पूरी तालिका, स्थिति-टिप्पणियों तथा योगफल की असंगति सहित, जीवन-वृत्त पर है।
चन्दे की पद्धति भी दर्ज है: 13 अगस्त 1944 की बैठक में तय हुआ कि सहारनपुर तथा मुजफ्फरनगर ज़िले के हर गाँव में शादी के मौके पर दोनों ओर से दान इकट्ठा किया जाए।