Chronology · कालक्रम
कालक्रम
1900 से 1983 तक की वे घटनाएँ जिनकी तिथि किसी स्रोत में अंकित है। प्रत्येक कालखण्ड के अन्त में लिखा है कि वह खण्ड किस स्रोत पर खड़ा है और उसमें कहाँ विरोध है। जिन घटनाओं की तिथि किसी स्रोत में नहीं मिली, वे यहाँ नहीं हैं — अनुमानित तिथि से क्रम नहीं भरा गया।
दो स्रोत
जन्म, निधन तथा प्रतिमा-अनावरण की तिथियाँ महाविद्यालय परिसर के शिलालेख से हैं; शेष क्रम 1982 की पुस्तिका से। 13 जून तथा 1 नवम्बर 1943 दोनों स्रोतों में समान रूप से अंकित हैं।
जहाँ दोनों टकराते हैं वहाँ शिलालेख निर्णायक माना गया है और पुस्तिका का पाठ मिटाया नहीं गया। पूरा विवरण सन्दर्भ तथा असंगति-सूची में।
जन्म तथा शिक्षा
12 अगस्त 1900
जन्म। ग्राम नौगांवां, बेगुपुर मौजे, तहसील बेहट, ज़िला सहारनपुर। पिता चौधरी श्रीराम, माता श्रीमती कर्मवती।
पुस्तिका यहाँ सन् 1897 देती है — तीन वर्ष का विरोध।
1910
ज़िला परिषद के प्राथमिक विद्यालय से चौथी कक्षा उत्तीर्ण। ताऊ चौधरी शिवराज ने दाखिल कराया था।
1915
मुजफ्फरनगर में जूनियर तथा सीनियर स्पेशल के बाद मिडिल अंग्रेजी परीक्षा उत्तीर्ण। हाईस्कूल छात्रवृत्ति छह रुपये मासिक; महासभा से भी छह रुपये स्वीकृत।
1917
हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण — पुस्तिका के अनुसार उस वर्ष हाईस्कूल पास करने वाले एकमात्र गूजर छात्र। रुड़की के थामसन इन्जीनियरिंग कालेज का इरादा छोड़कर मेरठ कॉलेज में प्रवेश।
स्रोत — जन्म-तिथि शिलालेख से, पूर्ण तिथि सहित। 1910, 1915 तथा 1917 के शिक्षा-वर्ष पुस्तिका से, केवल वर्ष के रूप में; वे 1900 की जन्म-तिथि से मेल नहीं खाते — असंगति-सूची।
पहला प्रयास और उसका टूटना
1919
महासभा ने प्रधान महाराज सिंह की देखरेख में सहारनपुर में डी.आई.ओ.एस. कार्यालय के सामने गूजर स्कूल स्थापित किया। मान्यता के मुआयने में अंग्रेज इन्सपैक्टर की रिपोर्ट के कारण मान्यता खटाई में पड़ी।
मई 1921
बी.ए. परीक्षा के तुरन्त बाद सहारनपुर के गूजर स्कूल का हैडमास्टर पद ग्रहण — अन्तरंग सभा द्वारा नियुक्ति। छह अध्यापक, गूजर छात्र केवल दो।
जनवरी 1922
प्रधान महाराज सिंह का देहान्त, 37 वर्ष की आयु में।
मार्च 1922
जैनबाग, रामपुर मनिहारान में महासभा का जलसा; अन्तरंग सभा का चुनाव। उसी जलसे में तय हुआ कि तजुर्बे के तौर पर रामपुर मनिहारान में प्राईमरी स्कूल खोला जाए।
जून 1922
रामपुर मनिहारान में किराये के मकान में स्कूल खुला; सहारनपुर का स्कूल औपचारिक रूप से रामपुर मनिहारान में तब्दील। छात्रावास भी किराये पर।
1924
पहली धर्मपत्नी का स्वर्गवास। व्यक्तिगत
1924–25
सभा का कोष खाली; चौ. जयमल सिंह के साथ चन्दे के लिए क्षेत्र में यात्रा। चकवाली गाँव की एक बुढ़िया ने बर्तन गिरवी रखकर चन्दा दिया।
जुलाई 1925
एल.टी. करने के लिए बनारस प्रस्थान; लाला दुलीचन्द को प्रधान-अध्यापक का कार्यभार।
1926
संस्था टूट गई। छात्रावास की चारपाई, लाइब्रेरी की पुस्तकें तथा फर्नीचर चौ. जयमल सिंह के यहाँ जमा किए गए।
स्रोत — सम्पूर्ण खण्ड पुस्तिका पृ. 4–31 से।
अध्यापन तथा तैयारी
1926–1935
डी.ए.वी. हाईस्कूल, मुजफ्फरनगर में भूगोल अध्यापक। छात्र जय कृष्ण गोपाल विशेष योग्यता से उत्तीर्ण — बाद में रूड़की विश्वविद्यालय के उप कुलपति।
1934
चौ. शेर सिंह (सैदपुर, बुलन्दशहर) के आग्रह पर जाट स्कूल का हैडमास्टर बनने के लिए डी.ए.वी. से इस्तीफा।
दिसम्बर 1935
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एम.ए. (भूगोल) की प्राइवेट परीक्षा — उस समय पूरे भारत में केवल वहीं भूगोल में एम.ए. था। लौटते समय विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी को सौ रुपये दान, जबकि वेतन 75 रुपये मासिक था।
जुलाई 1936
एम.ए. उत्तीर्ण।
1940
जाट स्कूल, मु.नगर चार वर्ष के अल्प काल में हाईस्कूल बना। उसी वर्ष गाजियाबाद के गूजर महासभा अधिवेशन में महासभा का खजांची नियुक्त — इस पद पर 1955 तक।
1942–43
जाट हाईस्कूल के छात्रों — मोहकम सिंह टिकौला, धीरज सिंह नारसन आदि — के बार-बार आग्रह पर रजिस्टर्ड सभा बनाने का निश्चय।
स्रोत — सम्पूर्ण खण्ड पुस्तिका पृ. 4–31 से; माह-सहित तिथियाँ अंकित, स्वतंत्र सत्यापन शेष। 1926–35 तथा 1934 के कथन आपस में टकराते हैं।
सभा तथा स्कूल की स्थापना
इस कालखण्ड की तिथियाँ पुस्तिका में प्रस्ताव-संख्या सहित दर्ज हैं, अतः यहाँ सबसे विस्तार से दी गई हैं। मूल प्रस्ताव-पुस्तिका मिलने पर इनकी स्वतंत्र पुष्टि सम्भव होगी।
13 जून 1943
गूजर विद्या प्रचारिणी सभा, मु.नगर – सहारनपुर सर्किल की स्थापना। नई मण्डी, मु.नगर स्थित निवास पर बुलाई गई बैठक में 15 व्यक्ति उपस्थित। पहले से तैयार नियमावली ज्यों की त्यों पास। एक महीने के भीतर सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट नं. 21 सन् 1860 के अन्तर्गत पंजीकरण।
जुलाई 1943
नई मंडी, मु.नगर में किराये के मकान में गूजर छात्रावास खुला — प्रस्ताव सं. 5 वाली बैठक का निर्णय।
10 अगस्त 1943
अन्तरंग सभा की बैठक, प्रस्ताव सं. 9 — रामपुर मनिहारान में चौ. आशा राम की चौपाल पर बैठक बुलाने का निर्णय।
12 सितम्बर 1943
सायं 3 बजे चौ. आशा राम की चौपाल पर बैठक; अम्बाला, सहारनपुर तथा मु.नगर ज़िले के प्रमुख लोग सम्मिलित। चौ. दीप सिंह लक्सर के प्रभाव तथा चौ. भरत सिंह की दानशीलता से भूमि प्राप्त।
21 सितम्बर 1943
श्रीमती पिरानी देवी तथा चौ. भरत सिंह ने देवबन्द जाकर 159 बीघे 15 बिस्से भूमि की रजिस्ट्री सभा के नाम कराई। दान-तालिका
31 अक्तूबर 1943
चन्दे के डेपुटेशन के क्रम में जौंड़खेड़ा; उसी दिन सायं रामपुर आकर आर्य समाज मन्दिर में यज्ञ।
1 नवम्बर 1943
गूजर ऐंग्लो वैदिक स्कूल, रामपुर मनिहारान का शुभारम्भ। प्रवेश के लिए 12 छात्रों के नाम; श्री राधेश्याम गुप्ता, श्री दुली चन्द तथा श्री होराम सिंह — तीन अध्यापक उसी दिन अस्थायी नियुक्त।
3 फरवरी 1944
जाट हाईस्कूल, मु.नगर से कार्यमुक्ति — इस्तीफा पहले स्वीकार नहीं हुआ था। जाते समय 500 रुपये देकर साधारण सभा की आजीवन सदस्यता ली।
4 फरवरी 1944
रामपुर पहुँचकर उत्साह घटा पाया; चौ. आशा राम के मकान पर भूख हड़ताल। दो दिन बाद लोग एकत्र हुए और चन्दे का काम फिर चला।
13 फरवरी 1944
अन्तरंग सभा की बैठक — इमारत का निर्माण शुरू करने का निश्चय। नक्शे के लिए शिष्य श्री जय प्रकाश गोयल, इन्जीनियर को थामसन कालेज रूड़की से बुलाया; एक कमरे का व्यय तीन हजार, छात्रावास के कमरे का एक हजार रुपये आँका गया।
14 फरवरी 1944
गूजर ऐंग्लो वैदिक स्कूल के मुस्तकिल हैडमास्टर पद पर नियुक्ति।
13 अगस्त 1944
बैठक में तय हुआ कि सहारनपुर तथा मुजफ्फरनगर ज़िले के हर गाँव में शादी के मौके पर दोनों ओर से दान इकट्ठा किया जाए। तीसरी से आठवीं तक कक्षाएँ प्रारम्भ, मान्यता प्राप्त; उस वर्ष 162 छात्र।
स्रोत — पुस्तिका पृ. 4–31, प्रस्ताव-संख्या तथा पूर्ण तिथि सहित; 13 जून तथा 1 नवम्बर 1943 शिलालेख से भी पुष्ट — इस पृष्ठ की एकमात्र दो-स्रोत तिथियाँ। शेष का स्वतंत्र सत्यापन शेष।
कक्षा-दर-कक्षा विस्तार
जुलाई 1945
श्रीमती पिरानी देवी की दान-भूमि पर कच्ची मिट्टी के सात कमरे बनाकर फूँस डाली गई; स्कूल आर्य समाज के भवन से इन कमरों में आ गया।
1946–47
नवीं कक्षा खोलने की अनुमति।
1948
हाईस्कूल का प्रथम बैच — परिणाम शत-प्रतिशत।
जुलाई 1949
आर्ट तथा कृषि में ग्यारहवीं कक्षा खोलने की स्वीकृति।
1951
इण्टर का पहला बैच। उसी वर्ष विज्ञान की मान्यता लेकर विज्ञान की ग्यारहवीं कक्षा भी प्रारम्भ।
23 मई 1952
संस्थापक प्रधान चौ. जवान सिंह बीनडा के स्थान पर चौ. धर्म सिंह पहांसू प्रधान नियुक्त।
1953
विज्ञान का पहला बैच उत्तीर्ण।
1957
कॉलेज भवन की E शक्ल पूरी हुई।
1958
आगरा विश्वविद्यालय को कॉलेज सम्बद्ध कराने हेतु प्रार्थना-पत्र। उप कुलपति के नैनीताल आने की सूचना पर तत्कालीन प्रधान चौ. जवान सिंह को साथ लेकर भेंट।
जुलाई 1959
कृषि में डिग्री कक्षाएँ खोलने की अनुमति उप कुलपति द्वारा प्रदत्त।
स्रोत — सम्पूर्ण खण्ड पुस्तिका पृ. 4–31 से।
अवकाश तथा उत्तर काल
1960
नियमानुसार अवकाश का वर्ष। प्रबन्ध समिति ने तीन वर्ष का विस्तार माँगा; सरकार ने दो वर्ष दिए।
30 जून 1962
प्रधानाचार्य पद से मुक्ति। उत्तराधिकारी के प्रश्न पर उनका सुझाव — बाबू संग्राम सिंह। अवकाश के बाद भी डिग्री कॉलेज में धर्म एवं संस्कृति पढ़ाते रहे।
1982
धर्मपत्नी स्वर्गीया श्रीमती मलखानी देवी की स्मृति में रामपुर कॉलेज तथा झबरेड़ा कॉलेज (1100 रुपये) को दान।
16 जनवरी 1983
निधन।
2 अप्रैल 1984
महाविद्यालय परिसर में उनकी प्रतिमा का अनावरण — स्वामी कल्याण देव जी महाराज के कर-कमलों द्वारा, चौ. नारायण सिंह (भूतपूर्व उप-मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश) की अध्यक्षता में।
स्रोत — निधन (16 जनवरी 1983) तथा अनावरण (2 अप्रैल 1984) शिलालेख से, पूर्ण तिथि सहित। 1960 तथा 1962 की पंक्तियाँ पुस्तिका से; 1982 का दान भी पुस्तिका से, जो निधन से आठ माह पूर्व लिखी गई थी।
इस कालक्रम के रिक्त स्थान
जो घटनाएँ पुस्तिका में तिथि के बिना आती हैं, वे यहाँ क्रम में नहीं रखी गई हैं। उनका विवरण जीवन-वृत्त पृष्ठ पर उसी क्रम में है जिस क्रम में पुस्तिका उन्हें देती है।
- पहला विवाह — वर्ष अंकित नहीं, केवल “मेरठ में इन्टर की पढ़ाई के दौरान”।
- शिक्षा-वर्षों का क्रम — 1900 की जन्म-तिथि मानने पर पुस्तिका के 1910, 1915 तथा 1917 के वर्ष तीन वर्ष आगे खिसकते हैं, अथवा वे वर्ष स्वयं संशोधन चाहते हैं। बोर्ड तथा विद्यालय अभिलेख से ही यह सुलझेगा; यहाँ दोनों पक्ष जैसे हैं वैसे रखे गए हैं।
- कैलाशपुर टाउन स्कूल में छात्रवृत्ति तथा छठी कक्षा — वर्ष अंकित नहीं।
- बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश का वर्ष — अंकित नहीं; बी.ए. 1921 से पूर्व।
- डेपुटेशन के दौरान पुत्र की निमोनिया से मृत्यु — तिथि अंकित नहीं।
- सभा के सहयोग से रामपुर मनिहारान के बाहर स्थापित पाँच संस्थाओं की स्थापना-तिथियाँ — पृष्ठ 27 में सूची है, वर्ष नहीं।
- अन्य दानकर्ताओं की भूमि-रजिस्ट्री की तिथियाँ — पुस्तिका के अनुसार यह भूमि “डिग्री कॉलेज बनने तक” प्राप्त होती रही।
स्रोत
इस पृष्ठ की तिथियाँ दो स्रोतों से हैं — जन्म, निधन तथा अनावरण प्रतिमा के शिलालेख से (MON-001), शेष ओम प्रकाश गांधी की पुस्तिका के पृष्ठ 4–31 से (PUB-001)। 13 जून 1943 तथा 1 नवम्बर 1943 दोनों में समान रूप से अंकित हैं। पूरा स्रोत-विवरण, वर्गीकरण तथा असंगति-सूची सन्दर्भ पृष्ठ पर।